दिल्ली बम धमाके और फरीदाबाद में मिले 2921 किलो विस्फोटक समेत आतंक की पूरी कहानी अल फलाह यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नंबर 17 के कमरा नंबर 13 में रची जा रही थी। तीसरी मंजिल पर स्थित ये कमरा यहां कार्यरत डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब को अलॉट था। इसके बगल वाला कमरा दिल्ली धमाके में शामिल डॉ. उमर को अलॉट था, लेकिन उमर अपना कमरा छोड़कर मुज्जमिल के साथ ही रहता था। मुजम्मिल और उमर अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च सेंटर से जुड़े थे।
यूनिवर्सिटी के सूत्रों ने बताया कि दोनों बीते कई महीनों से काफी अच्छे दोस्त थे। वे यूनिवर्सिटी परिसर में अधिकतर समय एक साथ बिताते थे और एक-दूसरे से ही चर्चाओं का दौर रखते थे। इनके कई अन्य दोस्त भी थे जो अक्सर इनके साथ देखे जाते रहे हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो दोनों बीते लगभग तीन महीने से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में थे। वे अक्सर अपने हैंडलर से बात करते थे। इसके चलते दोनों ही एक कमरे में अधिकतर समय रहते थे।
यूनिवर्सिटी के सूत्र ने बताया कि सोमवार को एटीएस टीम ने लगभग 5 घंटे तक यूनिवर्सिटी परिसर में पूछताछ की। टीम ने अपनी एटीएस की जैकेट पहनी और फिर तीसरी मंजिल पर डॉ. मुज्जमिल व उमर के कमरे का दरवाजा तोड़कर उसकी तलाशी ली। इस दौरान यहां से काफी सामान टीम ने जब्त भी किया है।
दिल्ली ब्लास्ट में जिस i20 कार का प्रयोग हुआ वह 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक यूनिवर्सिटी कैंपस में पार्क रही। खास बात यह है कि यह कार डॉ. मुज़म्मिल की स्विफ्ट के बगल में खड़ी थी, जो डॉ. शहीन के नाम पर रजिस्टर्ड है। 10 नवंबर की सुबह, घबराए हुए डॉ. उमर ने कार को कैंपस से बाहर निकाला। इसके बाद यह कार पहले कनॉट प्लेस, फिर मयूर विहार इलाके में देखी गई और अंत में चांदनी चौक की सुनेहरी मस्जिद पार्किंग में खड़ी मिली।
हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय की शुरुआत 1997 में एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। साल 2013 में अल-फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की राष्ट्रीय मूल्यांकन एवम् प्रत्यायन परिषद (NAAC) द्वारा ‘A’ श्रेणी में प्रमाणित किया गया। साल 2014 में हरियाणा की राज्य सरकार द्वारा ‘अल-फलाह’ को विश्वविद्यालय की श्रेणी प्रदान की गई। अल-फलाह मेडिकल कॉलेज भी यूनिवर्सिटी से ही संबंद्ध है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने शुरुआती सालाें में अल्पसंख्यक छात्रों के लिए एएमयू अलीगढ़ और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक बेहतरीन विकल्प के रूप में पेश किया। यह दिल्ली जामिया मिल्लिया इस्लामिया से केवल 30 किमी की दूरी पर स्थित है। यूनिवर्सिटी 80 एकड़ में स्थापति है। इस यूनिवर्सिटी का प्रबंधन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट करता है। जिसकी स्थापना उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1995 में हुई। अल-फ़लाह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी हैं। सिद्दीकी ने वंचित आबादी को चिकित्सा सेवा प्रदान करने के ट्रस्ट के मिशन के तहत, धौज, फरीदाबाद, हरियाणा, भारत में अल-फ़लाह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना की भी परिकल्पना की थी। ट्रस्ट में अध्यक्ष मुफ़्ती अब्दुल्ला कासिमी एम. ए. और सचिव मोहम्मद वाजिद डीएमई शामिल हैं। वर्तमान में अल फलाह यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) मोहम्मद परवेज हैं। इसकी वाइस चांसलर डॉ. भूपिंदर कौर आनंद हैं।
